रति का फोन इस तरह कटते ही शामिली की तो जैसे जान ही निकल गई। न जाने क्या हुआ रति को पहले तो कभी ऐसा नहीं किया। आखिर ऐसा कौन सा अपराध कर दिया उसने जिसकी मेरे से वो क्षमा मांग रही थी।इस उलझन के साथ ही रात भर शामिली रति का फोन ट्राई करती रही पर हर बार बस नॉट रिचेबल ही बताता रहा। अंतत: उसे न जाने कब नींद आ गई। सुबह उठने के बाद अलसाई सी शामिली चाय का प्याला हाथ में लिए हुए टी.वी. का चैनल घुमा रही थी तभी अकस्मात उसकी नजर एक न्यूज चैनल की ब्रेकिंग न्यूज जा टिकी और चाय का प्याला उसके हाथ से गिरकर वहीं जमीन पर चकनाचूर हो गया।
चूंकि शामिली एक पेंगगेस्ट हॉस्टल में रहती थी इसलिए उसके साथ रहने वाली पीजी मेट भी प्याले टूटने की आवाज से उसके पास आ गई और उसे संभालने की कोशिश करने लगी। वास्तव में खबर ही यही थी अखबार की एक पत्रकार रति अग्निहोत्री का शव संदिग्ध अवस्था में यमुना नदी से बरामद हुआ था, पुलिस की तफतीश जारी थी, लेकिन अब तक रति अग्निहोत्री ने आत्महत्या की या फिर उनकी हत्या की गई कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था और न ही उनके पास से कोई समान या मोबाइल फोन बरामद हुआ था।जहां पुलिस की उलझन सुलझ नहीं रही थी वहीं सभी खबरिया चैनल इस खबर को पूरी तरह से भुनाने में जुटे थे। कोई भी चैनल अपनी तरफ से कोई भी कसर नहीं छोड़ना चाहता था।कोई कहता कि यह आत्महत्या है और कोई कहता कि अखबार की इस जर्नालिस्ट की हत्या की गई है। वहीं एक चैनल तो पूरा का पूरा उनका कैरक्टर ही बताने में जुटा था, लेकिन सच्चाई क्या यह कोई भी नहीं जान रहा था। इधर, शामिली तो जैसे माटी की मूरत ही बन गई हो मानो और उसमें कोई जान ही न हो बस टकटकी लगाए देखे जा रही थी। शेष कल
शुक्रवार, 7 नवंबर 2008
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1 टिप्पणी:
इन्तिज़ार अगली पोस्ट का... बेहतरीन प्रस्तुति ..... धन्यवाद एवं शुभकामनाएं सहित
कृपया शब्द पुष्टिकरण प्रयोग न करें कमेन्ट हेतु, एक विनती :)
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