सोमवार, 22 दिसंबर 2008
अब तो हद ही कर दी कलयुगी इंसान ने
कलयुगी इंसान ने जब दरिंदगी की सारी हदें पार की तो वह भूल गया कि कुदरत ने उसके लिए क्या सीमाएं बनाई थी। उसे इतना भी सुध न रहा कि वह जो कर रहा वह प्रकृति के बनाएं नियमों के खिलाफ है। बस हवस की भूख में अंधा प्राणी दर-ब-दर अपनी प्यास बुझाने के लिए तलाशता रहा जरिया। कभी वह किसी किशोरी को बनाता शिकार तो कभी किसी सत्तर-अस्सी साल की बुजुर्ग महिला को और कभी कोई न मिला तो पड़ोस में खेल रही मासूम सी छह-सात साल की बच्ची को, लेकिन जब इतने पर भी उसकी भूख न मिटी तो पालने में खेल रही मात्र छह माह की बच्ची के साथ ही कर डाला बलात्कार, जिसे सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो सकते हैं। लेकिन इस बार तो हद ही हो गई जिसे शायद ही पहले किसी ने सुना होगा। एक युवक ने अपनी जिस्म की भूख मिटाने के लिए एक बेजुबान जानवर को बनाया अपना शिकार। जी हां यह वाकया है उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का।जहां बीते दिन मोहनलालगंज क्षेत्र के बाबूखेडा में ज्वाला सिंह नामक 24वर्षीय युवक ने एक गर्भवती बकरी के साथ किया बलात्कार जिसके बाद उस बेजुबान बकरी की मौत हो गई। आरोपी के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया और उसे गिरफ्तार भी कर लिया, लेकिन क्या उसे सजा मात्र दे देने से क्या हमारे समाज की मर्यादा वापस आ सकती है। आखिर यह कैसी भूख है जो अच्छे खासे इंसान को अंधा कर देती है। क्या है हमारे समाज के पास इसका कोई जवाब है आखिर क्या होनी चाहिए इसकी सजा। सजा या संस्कार?
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