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jindgi ke hashin khwab
गुरुवार, 7 अगस्त 2008
जिन्दगी और मंजिले
जिन्दगी की किताब में वक्क्त के लम्हों से एक बात लिखने दीजिये,
चुनौतियां बन जायंगी मंजिले, पर मंजिलो को तो ख्वाब बनने
दीजिये.
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जिन्दगी और मंजिले
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hi i m shardha, working in jagran.com(noida).
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